मध्य प्रदेश में कैसे इंजीनियरिंग कैरियर तबाह हुआ ?

मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग करियर का तबाह होना: 10 प्रमुख कारणों सहित विश्लेषण

मध्य प्रदेश, जिसे भारत का “दिल” कहा जाता है, उच्च शिक्षा में निरंतर विकास कर रहा है, विशेष रूप से तकनीकी और इंजीनियरिंग शिक्षा के क्षेत्र में। राज्य में सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, लेकिन इसके बावजूद यहाँ इंजीनियरिंग करियर का भविष्य तेजी से अंधकारमय होता जा रहा है। हज़ारों युवा हर साल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करते हैं, परंतु उनमें से अधिकांश या तो बेरोजगार रह जाते हैं या अपने क्षेत्र से इतर कम वेतन वाली नौकरियों में लग जाते हैं।

इस लेख में हम उन 10 प्रमुख कारणों का विश्लेषण करेंगे, जिनकी वजह से मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग करियर बर्बादी की कगार पर है।

मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग करियर का तबाह होना: 10 प्रमुख कारणों सहित विश्लेषण


1. शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट

मध्य प्रदेश में कई निजी इंजीनियरिंग कॉलेज केवल व्यावसायिक उद्देश्य से खोले गए हैं। इनमें योग्य फैकल्टी, आधुनिक प्रयोगशालाएं और रिसोर्सेज़ का घोर अभाव है। छात्रों को विषय की गहराई नहीं सिखाई जाती, जिससे उनका टेक्निकल नॉलेज सतही रह जाता है।

सरकारी कॉलेजों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। वहाँ संसाधनों की कमी, पुराने सिलेबस और लचर प्रशासन के कारण छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा नहीं मिल पाती।


2. प्रैक्टिकल नॉलेज का अभाव

इंजीनियरिंग एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल अनुभव अत्यंत आवश्यक होता है। लेकिन मध्य प्रदेश के अधिकांश कॉलेजों में प्रयोगशालाएं केवल नाम की होती हैं या बंद रहती हैं। परिणामस्वरूप छात्र केवल किताबें पढ़कर पास तो हो जाते हैं लेकिन असल दुनिया में तकनीकी समस्याओं का समाधान करना नहीं सीख पाते।


3. उद्योगों से जुड़ाव की कमी

राज्य में इंजीनियरिंग शिक्षा का उद्योगों (इंडस्ट्री) से समन्वय बहुत कम है। छात्रों को इंटर्नशिप, इंडस्ट्री विज़िट, लाइव प्रोजेक्ट और ऑन-जॉब ट्रेनिंग जैसे अवसर नहीं मिलते, जिससे उनकी व्यावसायिक दक्षता विकसित नहीं हो पाती।

कई कॉलेजों का उद्योगों के साथ कोई टाई-अप नहीं होता, जिससे छात्रों का करियर एकेडमिक दायरे तक सीमित रह जाता है।


4. रोजगार के अवसरों की कमी

मध्य प्रदेश में उद्योगिक विकास की गति धीमी है। बड़े टेक्नोलॉजी पार्क या आईटी कंपनियाँ अन्य राज्यों की तुलना में यहाँ बहुत कम हैं। इस कारण छात्रों को स्थानीय स्तर पर नौकरी के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। उन्हें अन्य राज्यों की ओर पलायन करना पड़ता है, जहाँ प्रतिस्पर्धा और अधिक होती है।


5. कमजोर प्लेसमेंट सिस्टम

बहुत से इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्लेसमेंट सेल सिर्फ औपचारिकता होती है। कंपनियाँ या तो कॉलेज में आती ही नहीं या फिर बहुत ही कम वेतन वाली नौकरियों की पेशकश करती हैं। कई बार प्लेसमेंट केवल सेल्फ-फंडेड होता है यानी छात्रों को पैसे देकर कंपनियों से ऑफर लेटर दिलवाया जाता है जो आगे काम नहीं आता।


6. कोर्स व करिकुलम में बदलाव की कमी

तकनीक के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, परंतु कॉलेजों का सिलेबस अब भी वर्षों पुराना है। नए जमाने की तकनीकों जैसे AI, डेटा साइंस, IoT, साइबर सिक्योरिटी आदि पर जोर नहीं दिया जाता। जब छात्र कॉलेज से बाहर आते हैं, तो उनका ज्ञान वर्तमान उद्योग की जरूरतों के अनुरूप नहीं होता।


7. प्रतियोगिता परीक्षाओं की ओर झुकाव

कई छात्र इंजीनियरिंग केवल डिग्री लेने के लिए करते हैं। उनका उद्देश्य UPSC या सरकारी नौकरियों की तैयारी होता है। इस वजह से वे इंजीनियरिंग को गंभीरता से नहीं लेते और यह क्षेत्र एक “डिग्री-होल्डिंग शॉर्टकट” बनकर रह जाता है।

मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग करियर का तबाह होना: 10 प्रमुख कारणों सहित विश्लेषण


8. मार्गदर्शन और करियर काउंसलिंग की कमी

छात्रों को यह नहीं सिखाया जाता कि उन्हें अपने करियर को कैसे बनाना है, किस क्षेत्र में जाना है, कौन से स्किल्स जरूरी हैं। करियर काउंसलिंग का न होना युवाओं को भ्रमित करता है और वे गलत दिशा में चले जाते हैं। शिक्षकों या गार्जियनों के पास भी पर्याप्त जानकारी नहीं होती कि छात्रों को कैसे गाइड किया जाए।

मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग करियर का तबाह होना: 10 प्रमुख कारणों सहित विश्लेषण


9. सरकारी नीतियों की असफलता

राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर कई योजनाएं लाई जाती हैं, जैसे स्टार्टअप नीति, इन्क्यूबेशन सेंटर आदि, लेकिन ये योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं होतीं। इसके अलावा, इंजीनियरिंग कॉलेजों की गुणवत्ता पर निगरानी रखने वाले निकाय भी ढीले हैं, जिससे खराब कॉलेज भी सालों तक चल रहे हैं।


10. छात्र स्वयं भी गंभीर नहीं

अंत में, कई छात्र स्वयं भी करियर के प्रति गंभीर नहीं होते। वे कॉलेज में केवल उपस्थिति भरने आते हैं, आत्मविकास या अतिरिक्त सीखने की कोशिश नहीं करते। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, कोडिंग, प्रोजेक्ट या सर्टिफिकेशन का सही उपयोग नहीं करते। आज के समय में यदि छात्र proactive नहीं है, तो नौकरी मिलना मुश्किल है।


निष्कर्ष

मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग करियर का तबाह होना: 10 प्रमुख कारणों सहित विश्लेषण

मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग करियर का संकट एक बहुआयामी समस्या है। इसमें कॉलेजों की गुणवत्ता, इंडस्ट्री से दूरी, रोजगार के अवसरों की कमी, पुराना पाठ्यक्रम, सरकारी नीतियों की असफलता और छात्रों की निष्क्रियता सब शामिल हैं।

इस संकट को दूर करने के लिए जरूरी है कि:

  1. कॉलेजों की गुणवत्ता में सुधार लाया जाए।
  2. फैकल्टी को अपडेटेड ट्रेनिंग दी जाए।
  3. इंडस्ट्री से कनेक्शन मजबूत किए जाएं।
  4. पाठ्यक्रम को समय के अनुसार अपडेट किया जाए।
  5. करियर गाइडेंस और स्किल डेवेलपमेंट पर जोर दिया जाए।
  6. छात्रों को खुद भी आगे बढ़कर सीखने के अवसर तलाशने होंगें।

यदि इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग शिक्षा केवल डिग्री की खान बनकर रह जाएगी, जिससे न राज्य का विकास होगा और न ही युवाओं का भविष्य सुधरेगा।


Leave a Comment