fraud expose in mp exams
मध्य प्रदेश में दूसरे राज्यों, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश से छात्रों को बुलाकर सरकारी परीक्षाओं में धांधली की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। यह गंभीर समस्या न केवल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को चुनौती देती है, बल्कि योग्य उम्मीदवारों के अवसरों को भी प्रभावित करती है।
🕵️♂️ कैसे होती है परीक्षा में धांधली?
fraud expose in mp exams
1. सॉल्वर गैंग्स का नेटवर्क
छत्तीसगढ़, बिहार और उत्तर प्रदेश से सॉल्वर (dummy candidates) को मध्य प्रदेश लाकर उन्हें परीक्षा में बैठाया जाता है। उदाहरण के लिए, 2025 में ग्वालियर के BSF ट्रेनिंग सेंटर में हुई आरक्षक भर्ती परीक्षा में नौ सॉल्वर पकड़े गए। इनके दस्तावेज़ों पर अभ्यर्थियों के नाम थे, लेकिन फोटो सॉल्वर का था। बायोमेट्रिक जांच में भी सॉल्वर के अंगूठे के निशान थे, जिससे धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
2. बायोमेट्रिक और दस्तावेज़ों में गड़बड़ी
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पिछले वर्षों में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में बायोमेट्रिक मिलान में गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं। उज्जैन में फिजिकल टेस्ट के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के अंगूठे के निशान और फोटो मेल नहीं खाए, जिससे फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। इसी प्रकार के मामले अन्य जिलों में भी सामने आए हैं।
3. नॉर्मलाइजेशन और स्कोरिंग में धांधली
कुछ मामलों में, परीक्षा के बाद नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया के दौरान भी स्कोरिंग में धांधली को लेकर सवाल उठते रहे है।जिस प्रकार से कभी 100 में 100 अंक आ जाना हो या नंबर में अप्रत्याशित उछाल या गिरावट देखने को मिलता है।जिससे मेहनती स्टूडेंट्स हमेशा तैयारी करके भी परेशान होता है अगर normalization प्रक्रिया में कोई धोका होता होगा तो यह भविष्य के लिए और स्टूडेंट्स की जिंदगी के लिए बहुत बड़ा खतरा है खासकर मिडल क्लास पढ़े लिखे दिन रात तैयारी में लगे युवाओं के लिए ।
4. मुखबिरी और दलालों की भूमिका
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परीक्षाओं में धांधली के लिए दलालों और मुखबिरों का नेटवर्क सक्रिय है। ये लोग योग्य उम्मीदवारों को परीक्षा में पास कराने के लिए सॉल्वर उपलब्ध कराते हैं और इसके बदले में मोटी रकम लेते हैं। कुछ मामलों में, सॉल्वर को परीक्षा केंद्रों पर बैठाकर असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दिलाई जाती है।
🛑 क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
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मध्य प्रदेश सरकार और पुलिस विभाग ने इन धांधलियों पर काबू पाने के लिए कई कदम उठाए हैं:
- सख्त कानूनी कार्रवाई: Vyapam घोटाले में दोषियों को सजा दिलाने के लिए विशेष अदालतें गठित की गई हैं। उदाहरण के लिए, एक आरोपी को सात साल की सजा सुनाई गई है।
- टेक्नोलॉजिकल उपाय: परीक्षा केंद्रों में बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी और जामर उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
- जागरूकता अभियान: छात्रों और अभिभावकों को परीक्षा में धांधली के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं।
🧠 निष्कर्ष
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मध्य प्रदेश में परीक्षा में धांधली एक संगठित अपराध बन चुकी है, जिसमें विभिन्न राज्यों के लोग शामिल हैं। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि योग्य उम्मीदवारों के अवसर भी छिन जाते हैं। सरकार और पुलिस विभाग को इस समस्या से निपटने के लिए और भी कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।