UPSC, IIT_ JEE, NEET जैसे exam में mp से क्यों होते है कम selection??

मध्य प्रदेश के छात्र UPSC, IIT-JEE, NEET जैसे राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में अपेक्षाकृत कम क्यों सफल होते हैं: एक विश्लेषण

भारत में UPSC, IIT-JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाएँ विद्यार्थियों के जीवन का एक अहम पड़ाव मानी जाती हैं। ये परीक्षाएँ न केवल करियर का निर्धारण करती हैं बल्कि देश की प्रतिभा को चिन्हित करने का कार्य भी करती हैं। हालांकि, यह देखा गया है कि मध्य प्रदेश (MP) जैसे बड़े राज्य के छात्र इन परीक्षाओं में अपेक्षाकृत कम संख्या में चयनित होते हैं। यह स्थिति कई प्रश्न खड़े करती है कि आखिर इसकी वजहें क्या हैं? UPSC, IIT_ JEE, NEET जैसे exam में mp से क्यों होते है कम selection??


1. शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता की कमी

मध्य प्रदेश के अधिकांश सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता चिंताजनक स्तर पर है। शिक्षक की कमी, अपूर्ण पाठ्यक्रम, और अपर्याप्त अधोसंरचना के कारण छात्रों को बुनियादी ज्ञान और मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। जिससे वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हो पाते।


2. कोचिंग संस्कृति का अभाव

UPSC, IIT_ JEE, NEET जैसे exam में mp से क्यों होते है कम selection??

राजस्थान के कोटा, महाराष्ट्र के पुणे या दिल्ली जैसे स्थानों में कोचिंग संस्थानों की भरमार है जो IIT, NEET और UPSC की तैयारी के लिए समर्पित हैं। वहीं, मध्य प्रदेश में इस तरह की कोचिंग सुविधाओं की संख्या और गुणवत्ता दोनों ही सीमित हैं। इससे छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में वैसा मार्गदर्शन नहीं मिल पाता जैसा अन्य राज्यों के छात्रों को मिलता है।


3. आर्थिक पिछड़ापन

मध्य प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय और पैसे दोनों की आवश्यकता होती है। कई मेधावी छात्र सिर्फ कोचिंग फीस या परीक्षा फार्म की राशि नहीं जुटा पाने के कारण पीछे रह जाते हैं।


4. तकनीकी संसाधनों की कमी

आज की प्रतियोगी परीक्षाएँ डिजिटल माध्यम पर भी आधारित होती जा रही हैं। ऑनलाइन टेस्ट सीरीज़, डिजिटल नोट्स, वीडियो लेक्चर आदि की उपलब्धता सफलता के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। लेकिन MP के छोटे शहरों और गांवों में इंटरनेट की सीमित उपलब्धता और डिजिटल उपकरणों की कमी छात्रों को प्रतियोगिता से बाहर कर देती है।


5. परिवार और समाज की जागरूकता की कमी

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अभी भी कई इलाकों में UPSC, JEE और NEET जैसी परीक्षाओं के महत्व को लेकर जागरूकता नहीं है। खासकर ग्रामीण इलाकों में माता-पिता या तो शिक्षा को प्राथमिकता नहीं देते या फिर केवल नौकरी पाने की दिशा में सोचते हैं, जिससे बच्चों को सही दिशा में प्रेरणा नहीं मिलती।


6. मूलभूत विषयों की कमजोर पकड़

UPSC, IIT-JEE और NEET जैसी परीक्षाएं अवधारणात्मक ज्ञान (Conceptual Understanding) की मांग करती हैं। MP के कई स्कूलों में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी जैसे विषयों की नींव मजबूत नहीं होती, जिसके कारण छात्र उच्च स्तरीय प्रश्नों को हल करने में असमर्थ रहते हैं।


7. प्रतियोगिता का अभाव और प्रेरणा की कमी

जब तक एक छात्र अपने आसपास प्रतियोगिता महसूस नहीं करता, तब तक उसमें बेहतर करने की भावना कम ही विकसित होती है। MP के कई क्षेत्रों में योग्य प्रतिस्पर्धा का वातावरण नहीं है जिससे छात्रों में जुनून और लक्ष्य के प्रति समर्पण की कमी देखने को मिलती है।


8. शहरी-ग्रामीण विभाजन

राज्य के ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में थोड़ी बेहतर सुविधाएं हैं। लेकिन अधिकांश छात्र गांवों से आते हैं और वहां न तो अच्छे स्कूल हैं, न लाइब्रेरी, और न ही मार्गदर्शक। जिससे उनकी तैयारी अधूरी रह जाती है।


9. करियर काउंसलिंग का अभाव

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छात्रों को सही समय पर सही दिशा देने के लिए करियर काउंसलिंग की आवश्यकता होती है, जो कि मध्य प्रदेश में लगभग न के बराबर है। इससे छात्रों को यह पता ही नहीं चलता कि उन्हें किन क्षेत्रों में जाना चाहिए, किस तरह तैयारी करनी चाहिए और कौन से संसाधन उपयोगी हैं।


10. राजनीतिक और प्रशासनिक उपेक्षा

मध्य प्रदेश की शिक्षा नीति और प्रशासनिक रवैया भी इस स्थिति के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। सरकार द्वारा शिक्षा को प्राथमिकता न देना, बजट की कमी, और योजनाओं का उचित क्रियान्वयन न होना भी छात्रों की सफलता में बाधक है।


निष्कर्ष:

मध्य प्रदेश के छात्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। लेकिन उपरोक्त कारणों के चलते वे राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में पीछे रह जाते हैं। यदि शिक्षा व्यवस्था को सशक्त किया जाए, कोचिंग संसाधनों को विकेन्द्रीकृत किया जाए, आर्थिक सहायता और डिजिटल सुविधाएं बढ़ाई जाएं, और समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच विकसित की जाए, तो निश्चित ही मध्य प्रदेश के छात्र इन परीक्षाओं में भी शीर्ष स्थान हासिल कर सकते हैं।

सरकार, समाज और शिक्षा संस्थानों को एकजुट होकर इस दिशा में कार्य करना होगा ताकि MP के छात्र भी सफलता की उस ऊँचाई को छू सकें जिसका वे पूर्ण रूप से हकदार हैं।


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